कार्बोहाइड्रेट कार्बन, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन से बने यौगिक हैं। काबोहाइड्रेट्स सभी जीवों में पाए जाते हैं। इनका निर्माण हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा करते हैं। इनका सामान्य सूत्र `C_(n) (H_(2) O)_(n)` है। काबोहाइड्रेट्स का शाब्दिक अर्थ कार्बन के हाइड्रेट (hydrate of carbon) है। कार्बोहाइड्रेट्स के बीच ग्लाइकोसिडिक बन्ध (glycosidic bond) पाए जाते हैं। काबोहाइड्रेट्स को सैंकेराइड्स (saccharides) भी कहते हैं, क्योंकि ये या तो शर्करा होते हैं अथवा शर्करा एककों के बहुलक (polymers)।
कार्बोहाइड्रेट्स हमारे भोजन का मुख्य भाग है। मनुष्य के लिए कार्बोहाइड्रेट्स के उत्तम स्रोत है-गेहूँ, चावल, मक्का, केला, अन्य फल व आलू आदि।
कार्बोहाइड्रेट के प्रकार (Type of carbohydrates) इनकी निम्नलिखित श्रेणियाँ होती हैं-
I. मोनोसैकेराइड्स (Monosaccharides)
ये सरल शर्कराएँ हैं। इनमें कार्बन के तीन से सात तक अणु होते हैं। इनका सामान्य सूत्र C, H2,0, होता है। इनका और छोटी इकाइयों में जल-अपघटन नहीं हो सकता। ये स्वाद में मीठे.तथा जल में घुलनशील होते हैं। कुछ सामान्य रूप से पायी जाने वाली मोनोसैकेराइड शर्कराएँ निम्नलिखित हैं
1. ट्रायोस शर्करा (Triose Sugars)-तीन कार्बन परमाणु वाली शर्कराएँ हैं `(C_(3)H_(6) O_(3))`
उदाहरण-ग्लिसरेल्डिहाइड।
2. टेट्रोज (Tetrose)-चार कार्बन परमाणु वाली शर्कराएँ हैं `(C_(4) H_(8) O_(4))`
उदाहरण-एरिथ्रोस (erythrose)|
3. पेन्टोस शर्करा (Pentose Sugars)-पाँच कार्बन परमाणु वाली शर्कराएँ हैं `(C_(5) H_(10) O_(5))`
उदाहरणं-राइबोस शर्करा, डिऑक्सीराइबोस `(C_(5) H_(10) O_(4))` शर्करा।
4. हेक्सोस शर्करा (Hexose Sugars)-छह कार्बन परमाणु वाली शर्कराएँ हैं `(C_(6)H_(12)O_(6))`
उदाहरण-ग्लूकोस (डैक्सट्रोज), फ्रक्टोस. (लेबुलोज), गैलेक्टोस।
5. हैप्टोज (Heptose)-सात कार्बन परमाणु वाली शर्कराएँ हैं`(C_(7)H_(14)O_(7))`
उदाहरण-सीडोहेप्टुलोज (sedoheptulose)।
II. ओलीगोसैकेराइड्स (jigosaccharides) - इनका निर्माण दो से दस तक मोनोसैकेराइड. अणुओं से होता है। ये भी जल में घुलनशील व स्वाद में मीठी होती हैं। - मोनोसैकेराइड्स ग्लाइकोसिडिक बन्ध (glycosidic bond) द्वारा आपस में जुड़े रहते हैं। ग्लाइकोसिडिक बन्ध एक मोनोसैकेराइड अणु के कीटोन या ऐल्डिहाइड समूह तथा दूसरे मोनोसैकेराइड अणु के हाइड्रॉक्सिल (OH) समूह से संयोजित होता है। ये अग्रलिखित प्रकार की होती है
1. डाइसकेराइड्स (Disaccharides)-ये 2 मोनोसैकेराइड्स अणुओं से बने होते हैं, जैसे
(i) माल्टोस (Maltose) इसका निर्माण ग्लूकोस के दो अणुओं के संघनन से होता है। यह प्राय: मीठे फलों में पायी जाती है।
(ii) सुक्रोस (Sucrose)—इसका निर्माण एक अणु ग्लूकोस तथा एक अणु फ्रक्टोस के संघनन से होता है। गन्ना तथा चुकन्दर से प्राप्त शर्करा सुक्रोस होती है।
(iii) लैक्टोस (Lactose) इसका निर्माण एक अणु ग्लूकोस तथा एक अणु-गैलैक्टोस के संघनन से होता है। यह सामान्य दुध शर्करा है।
डाइसैकेराइड्स के जल-अपघटन से दोनों मोनोसैकेराइड अणु पृथक् हो जाते हैं।
2. ट्राइसकेराइड्स (Trisaccharides), टेट्रासैकेराइड्स (Tetrasaccharides), : पेन्टासैकेराइड्स (Pentasaccharides) का निर्माण क्रमश: 3, 4, 5-मोनोसैकेराइड्स अणुओं से होता है।
III. पॉलिसैकेराइड्स (Polysaccharides)
पॉलिसैकेराइड्स, मोनोसैकेराइड तथा डाइसकेराइड्स के बहुलक (polymer) होते हैं। ये जल में अघुलनशील तथा स्वादहीन होते हैं। एक ही प्रकार के मोनोसैकेराइड अणुओं से-बने पॉलिसैंकेराइड होमोपॉलिसकेराइड (homopolysaccharide) कहलाते हैं, जैसे-मण्ड, ग्लाइकोजन, सेलुलोस आदि। दो या अधिक प्रकार के मोनोसैकेराइड या डाइसैकेराइड्स अणुओं से बने पॉलिसैकेराइड्स को हेटरोपॉलिसैकेराइड (heteropolysaccharide) कहते हैं, जैसे-काइटिन. म्यूसिन, हिपैरिन, हेमीसेलुलोस आदि। कुछ सामान्य पॉलिसैकेराइड्स निम्नलिखित हैं
(1) ग्लाइकोजन (Glycogen) यह जन्तु शरीर का संचित काबोहाइड्रेट है।
(2) स्टार्च या मण्ड (Starch)—यह पौधों का संचित कार्बोहाइड्रेट है।
(3) सेलुलोस (Cellulose)—यह पौधों का संरचनात्मक कार्बोहाइड्रेट है और कोशिका भित्ति की रचना में भाग लेता है।
(4) काइटिन (Chitin)-यह प्राणियों का.संरचनात्मकं काबोहाइड्रेट है। यह संघ आर्थोपोडा के जन्तुओं का बाह्य कंकाल बनाता है।
कार्बोहाइड्रेट के कार्य (महत्त्व) (Functions of Carbohydrates)
काबोहाइड्रेट के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं
(1) कार्बोहाइड्रेट को .कोशिकीय ईंधन. (cellular fuel) कहते हैं। जैविक कार्यों के लिए ग्लूकोस के ऑक्सीकरण से ऊर्जा उत्पन्न होती है।
(2) जीवधारी कार्बोहाइड्रेट (ग्लाइकोजन व स्टार्च) को भोजन के रूप में संचित किया जाता है।
(3) अनेक जन्तुओं जैसे आर्थोपोडा जन्तुओं में काइटिन बाह्य कंकाल तथा कवकों में कोशिका भित्ति का निर्माण करते हैं।
(4) पौधों मैं कोशिका भित्ति का निर्माण कार्बोहाइड्रेट (सेलुलोस) करते हैं। .(5) पेन्टोस शर्कराएँ न्यूक्लिक अम्लों की रचना में भाग लेती हैं। डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल आनुवंशिक लक्षणों की वंशागति में सहायक होते हैं। राइबोन्यूक्लिक अम्ल प्रोटीन संश्लेषण द्वारा उपापचय क्रियाओं का नियन्त्रण एवं नियमन करता है।
(6) आवश्यकता पड़ने पर कोशिका में ग्लूकोस से वसा तथा ऐमीनो अम्लों का निर्माण भी होता है।
(7) हिपैरिन (heparin) पॉलिसैकेराइड रक्त स्कन्दनरोधी (anticoagulant) का कार्य करता है।
(8) हायल्यूरॉनिक अम्ल (hyaluronic acid) अस्थि सन्धियों, स्नायुओं, कण्डराओं एवं ऊतकों में स्नेहक का कार्य करता है