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BIOLOGY
हरितलवक की संरचना तथा कार्य का विस्तृत व...

हरितलवक की संरचना तथा कार्य का विस्तृत वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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ये जैविक उत्प्रेरक (biological catalyst) होते हैं। विकर जैव-रासायनिक अभिक्रियाओं (biochemical reaction) की गति तथा विशिष्टता को नियन्त्रित करते हैं, परन्तु इसमें ये नष्ट नहीं होते हैं। विकर केवल जीवित कोशिकाओं में संश्लेषित होते हैं। अतः ये अन्य उत्प्रेरकों से भिन्न होते हैं। सर्वप्रथम जॉन जैकब बर्जीलियस (John.Jacob Bergilius, 1835) ने जैविक उत्प्रेरकों की उपस्थिति का पता लगाया था।
एन्जाइम शब्द का उपयोग कुहने (Kuhne, 1878) ने यीस्ट के घुलनशील किण्व (soluble ferment) के लिए किया। एडवर्ड बुकनर (Edward Buchner, 1897) ने एन्जाइम के सम्बन्ध में अधिक जानकारी प्रदान की। जे०बी० सुमनर (J.B. Suminer, 1926) ने बताया कि एन्जाइम प्रोटीन अणु होते हैं। सुमनर, नार्थरॉप,स्टैनले (J.B.Sumner., John Northrop & W.M..Stanley) को एन्जाइम तथा प्रोटीन को क्रिस्टल रूप में पृथक् करने के लिए 1947 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
"कोशिकाओं में उपापचयी अभिक्रियाओं की गति एवं विशिष्टता को नियन्त्रित करने वाले प्रोटीन से बने कार्बनिक पदार्थों को विकर (enzyme) कहते हैं।"
विकर की त्रिविमीय संरचना का अध्ययन एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी द्वारा किया जाता है।
सरल विकर घुलनशील ग्लोबुलर प्रोटीन अणुओं से बने होते हैं, जैसे-एमाइलेज (amylase), प्रोटिएज (protease) आदि। जटिल विकर में दो मुख्य घटक होते हैं
(1) प्रोटीन भाग एपोएन्जाइम (apoenzyme) तथा
(2) अनोटीन भाग प्रोस्थेटिक समूह (prosthetic group) सहएन्जाइम (co-enzyme) या सहकारक (cofactor) कहलाते हैं। जैसे-केटालेज (catalase), साइटोक्रोम-सी (cytochrome-c) आदि, सहएन्जाइम्स ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाओं में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। NAD, NADP, FMN, FAD, को-एन्जाइम-A. कुछ प्रमुख कार्बनिक सहएन्जाइम हैं।
प्रोटीन संश्लेषण की भाँति एन्जाइम का संश्लेषण भी जीन (gene) द्वारा नियन्त्रित होता है। एक जीन-एक एन्जाइम सिद्धान्त के अनुसार प्रत्येक एन्जाइम एक जीन द्वारा नियन्त्रित होता है। जटिल एन्जाइम्स का संश्लेषण एक से अधिक जीन्स द्वारा नियन्त्रित होता है।
राइबोन्यूक्लिएज विकर की संरचना (Structure of Ribonuclease Enzyme)
इस विकर की त्रिविमीय संरचना हिस, मूर तथा स्टाइन (1960) ने दी। यह विकर `3.2 xx 2.8 xx2.8` नैनोमीटर का गुर्दे के आकार का अणु है। इसमें 124 ऐमीनो अम्ल की एक पेप्टाइड शृंखला होती है। इसके N-टर्मिनल पर लाइसीन तथा टर्मिनल परं वैलीन पाया जाता है। इसमें सिस्टीन के 8 अणु मिलते हैं, जो 4 डाइसल्फाइड बन्ध 26-84,40-95, 59-110 व 65-72 ऐमीनो अम्ल के मध्य बनाते हैं। कुण्डली में कुल 4 मोड़ होते हैं। सक्रिय स्थल (active site) एक मोड़ (fold) के मध्य स्थित होता है। इसका अणु भार लगभग 14000 डाल्टन है।
विकर की क्रियाविधि (Mechanism of Enzyme Action)

विकर की संरचना। विकर को सक्रिय बनाने के लिए सक्रियण ऊर्जा (activation energy) को आवश्यकता होती है। ऊर्जाक्षेपी अभिक्रिया (exergonic reaction) में अभिक्रिया के अन्त में ऊर्जा मुक्त होती है जैसे
` XY + AB underset("अभिक्रिया ") overset("ऊर्जाक्षेपि ")toXA + YA ` + ऊर्जा
अभिक्रिया में सर्वप्रथम XY तथा AB के मध्य उपस्थित रासायनिक आबन्ध को तोड़ने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। एक बार बन्ध टूटने पर दोनों यौगिक क्रिया करते हैं, तब नया यौगिक बनता है (XA तथा YB)| इस अभिक्रिया में वांछित अल्पतम ऊर्जा अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा होती है। उत्पाद का ऊर्जा स्तर अवस्तर के ऊर्जा स्तर से कम होता है। सक्रियण ऊर्जा `E_(1)E_(3)` के समकक्ष है तथा ऊर्जा स्तर में कमी `E_(3)E_(4)` के समकक्ष होती है। उत्प्रेरित अभिक्रिया में विकर (enzyme) सक्रियण ऊर्जा की ऊँचाई `E_(1)E_(2)` को कम करता है।

विकर की क्रियाविधि। सक्रिय स्थल (Active Site) विकर का वह स्थान जिससे क्रियाधार (substrate) जुड़ता है, सक्रिय स्थल (active site) कहलाता है। इस स्थान पर क्रियाधार के अणु सक्रिय स्थल के साथ बन्ध बनाते हैं। अभिक्रिया की गति बढ़ने के साथ ये बन्ध शिथिल हो जाते हैं। उत्पाद के बन्ध कम दृढ़ होते हैं। अत: वे सक्किय स्थल से नहीं जुड़ते हैं तथा मुक्त हो जाते हैं
माइकेलिस व मेन्टन (Michaelis & Menten, 1913) के अनुसार, क्रियाधार (substrate) की सान्द्रता बढ़ने के साथ अभिक्रिया की गति एक मान तक बढ़ती है। संतृप्त अवस्था में क्रियाधार उत्प्रेरक कॉम्प्लेक्स बनता है।
`underset(("enzyme")) (E) + underset(("substrate"))(S)hArr underset(("enzyme-substrate comples"))(ES) to ES = underset(("enzyme"))(E) + underset(("product "))(P)`
क्रियाधार की वह सान्द्रता जिस पर विलयन में उपस्थित एन्जाइम अणुओं में से आधे अणु एन्जाइम-क्रियाधार सम्मिश्र (ES) .बनाते हैं, माइकेलिस स्थिरांक (Michaelis constant) कहलाती है। स्थिरांक का कम-मान,(value) क्रियाधार के प्रति एन्जाइम की अधिक सहलग्नता को प्रदर्शित करता है। एन्जाइम के माइकेलिस स्थिरांक में विविधता पायी जाती है! .
विकर की क्रियाविधि समझाने के लिए सामान्यत: निम्नलिखित दो मॉडल प्रस्तुत किए गए हैं:
1.फिशर का ताला-चाबी मॉडल (Fischer.s Lock and Key Model)--यह मॉडल एमिल फिशर (Emil Fisher, 1894) ने दिया था। उनके अनुसार ताले व चाबी के समान सक्रिय स्थल (active site) व क्रियाधार. (substrate) की तुलना की जा सकती है। जिस प्रकार ताला व चाबी का कॉम्प्लेक्स बनता है, उसी प्रकार विकर व क्रियाधार का भी कॉम्प्लेक्स बनता है।
विकर-क्रियाधार कॉम्प्लेक्स (enzyme-substrate complex) ऊर्जा मुक्त करके सक्रिय अवस्था में आता है तथा बन्ध शिथिल हो जाते हैं। .

2. कोशलैण्ड का प्रेरित आसंजन प्रतिरूपं (Koshland.s Induced Fit Model)-इस विधि को .कोशलैण्ड (Koshland, 1958) ने प्रस्तुत किया। इसके अनुसार विकर क्रियाधार (substrate) के सम्पर्क में आने पर क्रियाधार द्वारा प्रेरित आकार लेता है और सक्रिय स्थल बनता है, तब क्रियाधार व सक्रिय स्थल में आसंजन होता है, अर्थात् विकर में सक्रिय स्थल का निर्माण क्रियाधार (substrate) द्वारा प्रेरित . होता है। इस प्रकार विकर तथा क्रियाधार का सम्बन्ध दस्ताने तथा हाथ (glove and hand) जैसा होता है।
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