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BIOLOGY
आनुवंशिक विकार पर संक्षिप्त लेख लिखिए।...

आनुवंशिक विकार पर संक्षिप्त लेख लिखिए।

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ऊतक संवर्धन का इतिहास (History of Tissue Culture)-ऊतक संवर्धन का इतिहास कोशिका (Cell) की खोज के साथ प्रारम्भ होता है। इस क्षेत्र में सर्वप्रथम रॉबर्ट हुक (Robert Hook) नामक वैज्ञानिक ने वर्ष 1665 में सर्वप्रथम कोशिका की खोज कर पहला कदम रखा। इसके पश्चात् सन् 1839 में मैथियास जैकब स्लाइडेन तथा थियोडोर खान ने कोशिका सिद्धान्त प्रस्तुत किया। इस सिद्धान्त के अनुसार, कोशिका शरीर की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है। इस सिद्धान्त को आगे बढ़ाते हुए रूडोल्फ विरच्यून ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक कोशिका अपनी पूर्ववर्ती कोशिका से निर्मित होती है। इस तथ्य के आधार पर प्रस्तुत कोशिका सिद्धान्त जीव विज्ञान के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध हुआ।
आधुनिक कोशिका सिद्धान्त के अनुसार-
1. कोशिका शरीर की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है।
2. प्रत्येक नवीन कोशिका का निर्माण उसकी पूर्णवर्ती कोशिका से होता है।
3. कोशिका में सभी प्रकार की उपापचयी (Metabolic) क्रियाएँ समान होती हैं।
4. सजीवों में आनुवंशिक सूचनाओं का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में  स्थानान्तरण कोशिका के माध्यम से ही होता है।  
कोशिका सिद्धान्त कहता है कि किसी पादप की प्रत्येक कोशिका में उस पादप के सभी लक्षण विद्यमान होते हैं तथा उस कोशिका में उस पादप को विकसित करने की क्षमता पायी जाती है। पादप कोशिका में पायी जाने वाली यह क्षमता पूर्णशक्तता (Totipotancy) कहलाती है। पूर्णशक्तता शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1909 में मौर्गन नामक वैज्ञानिक द्वारा किया गया था। पादप कोशिका से पूर्ण पादप के विकास की संकल्पना सर्वप्रथम 1907 में जर्मन वैज्ञानिक हैबरलैण्ड ने प्रस्तुत की। उल्लेखनीय है कि अधिकांश जन्तुओं में पूर्ण शक्तता की क्षमता का अभाव होता है।
पादप ऊतक संवर्धन (Plant tissue Culture) का प्रथम प्रयास 1902 में वैज्ञानिक मोटलिब हेबरलैण्ड द्वारा किया गया था। निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि पादप जीवद्रव्यक, कोशिका, ऊतक, अंग अथवा सम्पूर्ण तन्त्र का नजमाकृत (Sterile) एव नियान्त्रत (Controlled) अवस्थाओम रासायनिक रूप से ज्ञात संवर्धन माध्यम पर संवर्धित करने की प्रक्रिया ऊतक संवर्धन (Tissue culture) कहलाती है।
ऊतक संवर्धन के क्षेत्र में वैज्ञानिकों द्वारा अनेक खोजें एवं योगदान किया गया। इसके अन्तर्गत 1922 में डब्ल्यू. के रॉबिन्स ने प्ररोह तथा शीर्ष  को सफलतापूर्वक संवर्धन किया। 1926 में एफ.डब्लू. बेण्ट द्वारा वृहिद हार्मोन ऑक्सिन की खोज की गई। दीर्घकालिक वृद्धिशील संवर्धनों की स्थापना आर.जे. मोगेर्ट व साथियों द्वारा 1939 में की गयी। 1946 में बॉल द्वारा प्ररोह शीर्ष संवर्धनों द्वारा सम्पूर्ण पादप का विकास किया गया। 1959 में जे. रेनर्ट (J, Renneret) द्वारा गाजर के निलम्बन संवर्धनों से भ्रूण का विकास किया गया। इसी श्रृंखला में एस. गुहा मुखर्जी व एस.सी. माहेश्वरी द्वारा धतूरे के परागकणों के संवर्धन द्वारा सर्वप्रथम अगुणित पादप विकसित किए गए। वर्ष 1983 में एम.डी, चिल्टन द्वारा तम्बाकू के ट्रांसजीनी पादप का संवर्धन किया गया।
पादप ऊतक संवर्धन के क्षेत्र में शोध एवं अनुसंधान निरन्तर जारी हैं, इस क्षेत्र में, वैज्ञानिकों द्वारा अनेक सफलताएँ प्राप्त की गयी हैं।
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