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BIOLOGY
परासरण, विसरण एवं अन्तःशोषण का संक्षेप म...

परासरण, विसरण एवं अन्तःशोषण का संक्षेप में वर्णन करते हुए इनका पादप कार्यिकी में महत्त्व बताइये।

लिखित उत्तर

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परासरण-किसी विलायक का अपनी अधिक सांद्रता वाले क्षेत्र से कम सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर अर्द्धपारगम्य झिल्ली के द्वारा होने वाले गमन को परासरण कहते हैं अथवा विलायक के अणुओं का कम सान्द्रता विलयन से अधिक सान्द्रता वाले विलयन की तरफ अर्द्धपारगम्य झिल्ली के द्वारा होने वाला गमन परासरण कहलाता है। समस्त जैविक तंत्रों में विलायक का कार्य जल करता है। अतः जल का अर्द्धपारगम्य झिल्ली से होने वाले विसरण को परासरण कहते हैं।.........
विसरण-
ठोस, द्रव तथा गैस के अणुओं का उनकी अधिक सान्द्रता के क्षेत्र से कम सान्द्रता के क्षेत्र की ओर गमन जब तक कि दोनों क्षेत्रों में उनकी सान्द्रताएँ समान न हो जाए, विसरण कहलाती है। एक पदार्थ का प्रसरण दूसरे पदार्थ के विसरण से पूर्णतः स्वतंत्र होता है। विसरित होने वाले आयन अथवा अणु सभी दिशाओं में अनियमित एवं सतत गतिशील होते हैं। विसरण द्वारा ही प्रकाश संश्लेषण व श्वसन के दौरान गैसों का आदान प्रदान होता है। .....
अन्तःशोषण -
• कोलाइडी या सूखे ठोस पदार्थों द्वारा जल के अवशोषण (अधिशोषण) को अन्तःशोषण कहते हैं।
• अंकुरण के समय बीजों के स्फुटन में अंत:शोषण की प्रमुख भूमिका रहती है।...............
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