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Class 12
PHYSICS
धातु की एक द्रव्यमान तथा । त्रिज्या की छ...

धातु की एक द्रव्यमान तथा । त्रिज्या की छड़ 04 को 0 से गुजरने वाली क्षैतिज अक्ष के परितः एक नियत कोणीय चाल `omega`से ऊर्ध्व तल में घुमाया जाता है। इसका मुक्त सिरा A, घूर्णन तल में स्थित एक सुचालक वृत्ताकार वलय के अनुदिश बिना घर्षण के सरकता जाता है। घूर्णन तल के लम्बवत् तथा तल के भीतरी ओर एकसमान व नियत चुम्बकीय प्रेरण B चित्रानुसार लगाया जाता है। एक प्रेरक L तथा बाह्य प्रतिरोध R को स्विच 5 के द्वारा बिन्दु० तथा वलय पर एक बिन्दु के बीच जोड़कर परिपथ बनाया जाता है। वलय तथा छड़ के प्रतिरोध नगण्य माने जा सकते हैं। प्रारम्भ में स्विच S खुला है।
(a) स्विच के सिरों के बीच प्रेरित वि० वा० बल (emf) क्या है ?
(b) समय 1-0 पर स्विच बन्द कर दिया जाता है (i) समय के फलन के रूप में विद्युत धारा का समीकरण ज्ञात कीजिए,
(ii) स्थायी अवस्था में, कोणीय वेग नियत बनाए रखने के लिए समय पर निर्भर आवश्यक बल आघूर्ण ज्ञात कीजिए। यह दिया है कि समय `t = 0` पर छड़ OA धनात्मक x-अक्ष के अनुदिश थी

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
`e=(Bomegar^(2))/(2R)`
`i=(Bomegar^(2))/(2R)[1-e^-((R)/(L))t]`
`tauनेट=(B^(2)omegar^(4))/(4r)+(mgr)/(2)cosomegat`

माना केन्द्र 0 से दूरी पर छड़ 0A के एक छोटे अल्पांश की लम्बाई dx है। इस अल्पांश की चाल, `v=xomega`

एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र B में अल्पांश dr में उत्पन्न प्रेरित वि० वा० बल, `de = (B)(xomega)dx`

`[e= BvLसे]`
OA के आर-पार कुल वि० वा० बल,
`e=int_(x=0)^(x=r)de=int_(0)^(r)Bomegaxdx=(Bomegar^(2))/(2)`
`impliese=(Bomegar^(2))/(2)`
Oतथा A के बीच एक नियत वि० वा० बल या विभवान्तर,`e=(Bomegar^(2))/(2)`तुल्य परिपथ चित्रानुसार होगा।
समय `t=0` पर स्विच बन्द है। अत: यह LR परिपथ में धारा वृद्धि की स्थिति है।

किसी समय t पर धारा, `i=i_(0)(1-e^(-t//tau_(L)))`
`i_(0)=(e)/(R)=(Bomegar^(2))/(2R)`
because`tau_(L)=L//R`
`thereforei=(Bomegar^(2))/(2R)[1-e^-((R)/(L))t]`
(ii) नियत कोणीय चाल पर बल, आघूर्ण = 0

स्थायी धारा का मान, `i=i_(0) = (Bomegar^(2))/(2R)` दायें हाथ के नियम से, यह धारा परिधि से केन्द्र की ओर होगी तथा संगत चुम्बकीय बल F की दिशा चित्रानुसार होगी।`i_(0)=(e)/(R)=(Bomegar^(2))/(2R)`
because`tau_(L)=L//R`
`thereforei=(Bomegar^(2))/(2R)[1-e^-((R)/(L))t]`के प्रयोग से]
केन्द्र Oके परितः इस बल का आघूर्ण
`tau_(F_(m))=F_(m).(r)/(2)=(B^(2)omegar^(4))/(4R)`[दक्षिणावर्त]
इसी प्रकार, भार mg का O के परितः बल-आघूर्ण
`tau_(mg)=(mg)(r)/(2)costheta=(mgr)/(2)cosomegat`[दक्षिणावर्ती]
therefore`tau_(नेट)=tau_(F_(m))+tau_(mg)=(B^(2)omegar^(4))/(4R)+(mgr)/(2)cosomegat`[दक्षिणावर्ती]
कोणीय चाल को बनाए रखने के लिए आवश्यक बाह्य बल-आघूर्ण`tau_(बाह्य)=tauF_(m)+tau_(mg)+tau_(mg)=(B^(2)omegar^(4))/(4R)+(mgr)/(2)cosomegat (वामावर्त)`
ध्यान देने योग्य है कि `(pi)/(2)ltthetalt(3pi)/(2)` के लिए भार का आघूर्ण वामावर्त दिशा में होगा, जिसका चिन्ह स्वतः ही स्थापित हो जाएगा क्योंकि `cos theta` = ऋणात्मक `(pi)/(2)ltthetalt(3pi)/(2)`के लिए)
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