रेडियो खगोलिकी के विकास के साथ यह ज्ञात होने लगा कि जिन रासायनिक अणुओं ने पृथ्वी पर जीवन को जन्म दिया वे अणु अंतरिक्ष में बहुतायत से उपस्थित है | अतः अंतरिक्ष में उपस्थित पृथ्वी जैसे असंख्य ग्रहों में से कुछ पर जीवन उपस्थित हो सकता है | 1972 में पायोनियर 10 के छोड़े जाने के समय तो पृथ्वी बाहर, मानव से बहुत अधिक विकसित, जीवन होने कि संभावना स्पष्ट रूप से स्वीकारी जाने लगी थी | परन्तु वैज्ञानिकों को उस समय यह भी भय था कि पृथ्वी बाह्य कि सभ्यता, हमारी किसी भूल से नाराज होकर हम पृथ्वीवासियों पर आक्रमण नहीं कर दें | पायोनियर 10 अंतरिक्ष यान को बृहस्पति ग्रह के पास से होते हुए हमारे सौरमण्डल से बाहर जाना था | इस बात का भी भय था कि अपनी अनंत यात्रा के दौरान पायोनियर 10 अंतरिक्ष यान किसी विकसित सभ्यता के सम्पर्क में आ सकता था | विकसित सभ्यता पायोनियर 10 अंतरिक्ष यान को उन पर मानव सभ्यता द्वारा किया हमला मान हम पर पलटवार भी कर सकती थी | इस गलतफ़हमी को दूर करने के लिए पायोनियर 10 अंतरिक्ष यान पर एक प्लेट पर मानव स्त्री-पुरुष को मित्रता की मुद्रा में चित्रित किया गया तथा सांकेतिक भाषा में यान के पृथ्वी से भेजे जाने की बात प्रदर्शित की गई थी | योजना अनुसार पायोनियर 10 अंतरिक्ष यान बृहस्पति के पास से होते हुए हमारे सौरमण्डल से बाहर चला गया किन्तु किसी बाह्य सभ्यता का कोई संकेत नहीं मिला है |
