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BIOLOGY
मनुष्य में भ्रूणीय विकास की प्रक्रिया का...

मनुष्य में भ्रूणीय विकास की प्रक्रिया का ब्लास्टुला निर्माण तक वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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मनुष्य में प्रत्यक्ष भ्रूणीय विकास माता के गर्भाशय में होता है। भ्रूणीय विकास निम्नलिखित चरणों में पूर्ण होता है -
मनुष्य में निषेचन फैलोपियन नलिका में होता है। निषेचन के परिणामस्वरूप द्विगुणित युग्मनज (zygote) बनता है।
विदलन तथा कोरकपुटी निर्माण (Cleavage and Formation of Blastocyst)
युग्मनज (zygote) में होने वाला ऐसा कोशिका विभाजन जिसमें पुत्री कोशिकाओं के आकार में वृद्धि नहीं होती विदलन (cleavage) कहलाता है। इस प्रकार बनने वाली कोशिकाएं जोना पेल्यूसिडा (zona pellucida) के अन्दर ही बनी रहती हैं। अत: उनके आकार में वृद्धि नहीं होती (भ्रूणों में होने वाली यह विशिष्ट प्रकार की वृद्धि मल्टीप्लीकेटिव वृद्धि (multiplicative growth) कही जाती है।) प्रत्येक विदलन के बाद संतति कोशिका का आकार और छोटा हो जाता है। सभी विभाजन समसूत्री प्रकार (mitotic) के होते हैं तथा विदलन से बनी कोशिकाएँ कोरक खण्ड या ब्लास्टोमियर (blastomeres) कहलाती हैं। जीवों में विकास की यह अवस्था विकास की कोशिकीय अवस्था (cellular stage of development) कहलाती है।
मनुष्य में होने वाले विदलन होलोब्लास्टिक (holoblastic) प्रकार के होते हैं। इसका तात्पर्य है विदलन रेखा (cleavage furrow) कोशिका को पूरे व्यास में विभाजित कर देती है।
युग्मनज में विभाजन होने से इस प्रकार 2,4,8 व 16 कोशिकाएँ बनती हैं भ्रूण की यह 8-16 कोरक खण्डों वाली अवस्था तूतक या मोरुला (morula) कहलाती है। मोरुला कोशिकाओं की एक ठोस गेंद के समान होता है। इस अवस्था में भ्रूण जोना पेल्यूसिंडा के अन्दर ही सुरक्षित रहता है।

कोरक पुटी या ब्लास्टोसिस्ट (Blastocyst)-मोरुला में हुए विभाजनों से भ्रूण में कोरक खण्डों की संख्या में वृद्धि होती है। इसकी गर्भाशय की ओर की गति जारी रहती है। साथ ही इसमें कुछ संरचनात्मक बदलाव होते हैं। मोरुला की कोशिकाओं में सक्रिय पुनर्गठन प्रारम्भ हो जाता है, फलस्वरूप बाह्य या परिधि की ओर की कोशिकाएँ चपटी हो जाती हैं। इन कोशिकाओं को पोष कोरक कोशिकाएँ या ट्रोफोब्लास्ट (trophoblast) कहते हैं। अन्दर की कोशिकाएँ एक अन्तर कोशिका समूह (inner cell mass) के रूप में संगठित हो जाती हैं। ट्रोफोब्लास्ट भ्रूण का बाह्य पोषक स्तर बनाता है।
ये कोशिकाएँ अण्डवाहिनी व गर्भाशय में उपस्थित द्रव का अवशोषण करती हैं। यह द्रव इस भ्रूण के केन्द्रीय भाग में एकत्रित हो जाता है, फलस्वरूप केन्द्र में एक छोटी-सी गुहा बन जाती है जिसे ब्लास्टोसील (blastocoel) कहते हैं, फलस्वरूप कोशिकाओं की ठोस गेंद अब ब्लास्टोसील बनने के बाद ब्लास्टुला (blastula) में बदल जाती है।
मनुष्य में अन्तर्रोपण ब्लास्टोसिस्ट अवस्था (कोरक पुटी अवस्था) में निषेचन के लगभग 7 दिन बाद होता है।
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