क्रियाकलाप-प्लास्टिक के स्ट्रॉ के दो टुकड़े कर एक टुकड़े को मेज के किनारे धागे की सहायता से लटकाइए। अब
(i) दूसरे स्ट्रॉ के टुकड़े को उस स्ट्रॉ के टुकड़े के पास ले जाओ ध्यान रहे कि टुकड़े छुएं नहीं। ये किसी प्रकार का आकर्षण . नहीं है क्योंकि दोनों अनावेशित हैं अर्थात् इन पर किसी प्रकार का स्थिर वैद्युत बल उपस्थित नहीं है।
(ii) अब अपने हाथ वाले स्ट्रॉ को कागज की शीट के साथ रगड़ो और मेज पर लटकाए दूसरे टुकड़े के पास ले जाओ। दोनों एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। हाथ वाला स्ट्रॉ का टुकड़ा आवेशित है जबकि दूसरा अनावेशित । अतः आवेशित वस्तु अनावेशित वस्तु को आकर्षित करती है।
(iii) अब मेज पर लटकाए स्ट्रॉ के टुकड़े को भी कागज की शीट के साथ रगड़ो। अब पुनः दोनों टुकड़ों को पास-पास लाओ। हम देखते हैं कि दोनों स्ट्रॉ के टुकड़ों में प्रतिकर्षण होता है अर्थात् आवेशित वस्तु दूसरी समान आवेशित वस्तु को प्रतिकर्षित करती है। कागज की शीट से रगड़ा जाने पर स्ट्रॉ स्थिर वैद्युत आवेश उपार्जित कर लेता है यही स्थिर वैद्युत बल का उदाहरण है। दोनों स्ट्रॉ के टुकड़ों को बिना संपर्क में लाए भी आकर्षण होता है अतः यह बल असंपर्क बल है।