बल प्रमुख रूप से दो प्रकार के होते हैं
(A) संपर्क बल-जो बल वस्तु के संपर्क में आने पर कार्य करे उसे संपर्क बल कहते हैं। संपर्क बल दो प्रकार का होता है (1) पेशीय बल, (2) घर्षण बल।
1. पेशीय बल हमारी मांसपेशियाँ अनेक कार्य, जैसे पानी से भरी बाल्टी उठाना, बस्ता उठाना, गाड़ी को धक्का देना आदि बल के द्वारा करती हैं। इसी प्रकार बैलों के द्वारा बैलगाड़ी को खींचना, घोड़े द्वारा सवार को सवारी कराना आदि क्रियाकलाप भी पेशीय बल के द्वारा होते हैं।
2. घर्षण बल-ऐसी गतिशील वस्तुएँ जो विपरीत दिशा में गति कर रही हों और दो सतहों के संपर्क द्वारा जो बल उत्पन्न करती हैं वह घर्षण बल होता है। मैदान में लुढ़कती गेंद थोड़ी दूरी पर जाकर धीरे-धीरे रुक जाती है ऐसा घर्षण बल के कारण ही होता है जो मैदान की सतह व गेंद के बीच लगता है।
(B) असंपर्क बल-इस बल में, वस्तु के संपर्क की आवश्यकता नहीं पड़ती। यह तीन प्रकार का होता है- (1) चुंबकीय बल, (2) स्थिर वैद्युत बल, (3) गुरुत्वाकर्षण बल।
1. चुंबकीय बल-चुंबक के ध्रुवों के बीच आकर्षण व प्रतिकर्षण या फिर चुंबकीय पदार्थों के बीच आकर्षण जिस बल द्वारा होता है, उसे चुंबकीय बल कहते हैं। इस बल में वस्तु के संपर्क की आवश्यकता नहीं होती बल्कि दूर से ही प्रभाव उत्पन्न होता है।
2. स्थिर वैद्युत बल-इस बल का प्रमुख कारण विद्युत आवेश है। एक आवेशित वस्तु द्वारा किसी अन्य आवेशित वस्तु या अनावेशित वस्तु बिना सीधे संपर्क के आकर्षित होती है। इस बल को स्थिर वैद्युत बल कहते हैं। सूखे बालों में कंघी रगड़कर यदि कागज के टुकड़ों के नजदीक लाई जाए तो कंघी कागज के टुकड़ों को इसी बल द्वारा आकर्षित करती है।
3. गुरुत्वाकर्षण बल-विश्व में प्रत्येक पिंड अन्य पिंड को जिस बल के द्वारा आकर्षित करता है उसे गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं। पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को अपने केंद्र की ओर गुरुत्व (गुरुत्व बल) के द्वारा आकर्षित करती है इसलिए प्रत्येक वस्तु पृथ्वी तल पर आकर गिरती है।