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BIOLOGY
मानव समष्टि से आप क्या समझते हैं? इस पर ...

मानव समष्टि से आप क्या समझते हैं? इस पर प्रभाव डालने वाले कारकों के नाम लिखिए।

लिखित उत्तर

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वृद्धि (Growth)वृद्धिं समस्त उपापंचयी प्रक्रियाओं (उपचय तथा अपचय) का अन्तिम परिणाम है। इसमें पौधे के आकार एवं आयतन में अपरिवर्तनीय या चिरस्थायी वर्धन होता है। इसके साथ प्राय: शुष्क भार एवं जीवद्रव्य की मात्रा में भी वर्धन "होता है।
वृद्धि पर प्रभाव डालने वाले कारक
(Factors affecting Growth) वृद्धि समस्त उपापचयी क्रियाओं द्वारा उत्पन्न होने वाला एक जटिल प्रभाव है, अतः जो भी कारक इन क्रियाओं पर प्रभाव डालते हैं, वृद्धि को भी प्रभावित करते हैं। कुछ प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं
1.जल (Water) विभिन्न पदार्थों का कोशिका में आदान-प्रदान जल के माध्यम से होता है। कोशिका की समस्त जैविक क्रियाएँ जल की उपस्थिति में ही होती हैं। अधिकांश एन्जाइम जल की उपस्थिति में ही सक्रिय होते हैं। पौधे में पदार्थों का " आदान-प्रदान, भोज्य पदार्थों का परिवहन घुलनशील अवस्था में ही होता है। कोशिकाएँ स्फीत स्थिति में क्रियाशील होती हैं।
2. ऑक्सीजन (Oxygen) विभिन्न उपापचयी क्रियाओं के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। कोशिकाओं को ऊर्जा भोज्य पदार्थों के जैव रासायनिक ऑक्सीकरण से प्राप्त होती है। इस क्रिया को श्वसन कहते हैं। श्वसन के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।
3. तापमान (Temperature)-पौधों के लिए उपयुक्त तापमान 25-`35^(@)`C होता है। `10^(@)`C ताप बढ़ाने से जैविक क्रियाओं की दर दोगुनी से तिगुनी हो जाती है (अर्थात् Q10 = 2-3)। लेकिन `45^(@)`C से अधिक ताप का पौधे की क्रियाओं पर प्रतिकूल प्रभाव होता है।
4.खनिज लवण (Mineral Salts) -पौधों की वृद्धि के लिए खनिज लवण आवश्यक होते हैं। पौधे में लगभग 60 तत्त्व पाए जाते हैं। इनमें से ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, कार्बन, सल्फर, फॉस्फोरस, नाइट्रोजन सहित 17 तत्त्व पौधों की वृद्धि एवं वर्धन के लिए. आवश्यक होते हैं। ये कोशिका की विभिन्न क्रियाओं को प्रभावित करते हैं। इनकी कमी या अधिकता से अनेक क्रियात्मक विकार उत्पन्न हो जाते हैं।
5. हॉर्मोन्स (Hormones)-अत्यन्त थोड़ी मात्रा में ये जैविक क्रियाओं को प्रभावित करते हैं।
6. प्रकाश (Light)-प्रकाश अनेक कार्यिकी सम स्याओं का समाधान है। क्लोरोफिल निर्माण, प्रकाश संश्लेषण जैसी महत्त्वपूर्ण क्रियाएँ जो वृद्धि के लिए पोषक पदार्थों का निर्माण करती हैं। प्रकाश के बिना नहीं हो सकतीं। यद्यपि पौधों में वृद्धि रात्रि में अधिक होती है, फिर भी अन्धकार में यदि पौधों को उगाया जाए तो वे पीले, दुर्बल, मुलायम तथा अविकसित रहते हैं। पत्तियाँ ठीक से विकसित नहीं होती हैं। ये पीली होती हैं (क्लोरोफिल न बनने के कारण)। इस प्रकार का पौधा पाण्डुरित (etiolation) कहलाता है। पौधों पर प्रकाश के अभाव में पुष्पन नहीं होता। मन्द प्रकाश का भी ऐसा ही प्रभाव पड़ सकता है। इस प्रकार प्रकाश के लिए निम्नलिखित चार बातें महत्त्वपूर्ण हैं,
(i) प्रकाशकीय तीव्रता (Intensity of Light)-अधिक तीव्र प्रकाश वृद्धि को कम करता है, किन्तु पौधे स्वस्थं होते हैं।
(ii) प्रकाश का प्रकार (Quality of Light)-छोटी किरणें (पराबैंगनी) तथा अधिक बड़ी किरणें (अवरक्त लाल) वृद्धि को सीमित करती हैं। लाल तथा नीली प्रकाश किरणें वृद्धि के लिए सबसे अधिक उपयुक्त प्रतीत होती हैं।
(iii) प्रकाश काल (Duration of Light)--प्रकाश काल का प्रभाव प्रमुखतः पुष्पन पर होता है। पुष्पन पर इस प्रभाव को दीप्तिकालिता (photoperiodism) कहते हैं।
(iv) प्रकाश की दिशा (Direction of Light)-प्रकाश की दिशा पौधे की गति को प्रभावित करती है। तने के प्रकाश की .ओर मुड़ने को प्रकाशानुवर्तन (phototropism) कहते हैं।
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