प्रश्नानुसार, गोली का द्रव्यमान m = 0.012 किग्रा, गोली का प्रारम्भिक वेग u = 70 मी/से , गुटके का द्रव्यमान M = 0.4किग्रा,
गुटके का प्रारम्भिक वेग `u'=0`
चूँकि टकराने के बाद गोली गुटके के भीतर ही विराम में आ जाती है, अतः गोली + गुलके निकाय का संयुक्त द्रव्यमान = `M+m`.
माना टक्कर के पश्चात निकाय का वेग व है तब संवेग संरक्षण सिद्धांत से,
अथवा `v=(m u+Mu')/(M+m)`
`=(0.012xx70+0.4xx0)/(0.012+0.4)`मीटर/सेकण्ड
अब इस वेग के प्रभाव में निकाय (गोली + गुटका ) द्वारा अर्जित गतिज ऊर्जा `(1)/(2)(M+m)v^(2)` होगी जिसके कारण वह अपनी साम्यावस्था से दूसरी ओर विस्थापित हो जायेगा । माना साम्यावस्था से निकाय h ऊँचाई ऊपर उठ जाता है। तब यान्त्रिक ऊर्जा संरक्षण सिद्धांत से यदि वायु आदि के प्रतिरोध को नगण्य माने, तो साम्यावस्था में गतिशील गोली के टकराने से अर्जित ऊर्जा h ऊँचाई की स्थिति में स्थितिज ऊर्जा के तुल्य होना चाहिए ।
अतः `(1)/(2)(m+M)v^(2)=(M+m)gh" ...(i)"`
`therefore" "h=(v^(2))/(2g)=((2.04)^(2))/(2xx9.8)=0.212` मीटर = 21.2 सेमी ।
निकाय की प्रारम्भ में सम्पूर्ण ऊर्जा
`=(1)/(2)m u^(2)=(1)/(2)xx0.012xx(70)^(2)=29.4` जूल
तथा निकाय की बाद में सम्पूर्ण ऊर्जा `=(M+m_gh.`
परन्तु समीकरण (i) से, `(M+m)gh=(1)/(2)(m+M)v^(2)`
अतः निकाय की बाद में सम्पूर्ण ऊर्जा `=(1)/(2)(m+M)v^(2)`
`=(1)/(2)(0.012+0.4)xx(2.04)^(2)` जूल= 0.86 जूल
अतः स्पष्ट है कि संघट्ट के कारण निकाय की ऊर्जा में क्षति हो रही है सम्भवतः यही ऊर्जा जिसकी हानि हुई है ऊष्मा के रूप में बदल गयी हो ।
अतः उतपन्न ऊष्मा `=29.4-0.86"जूल "=28.54"जूल "।`