माना घर्षणरहित आनत समतलों AB व AC पर खिसक रहे पत्थरों के द्रव्यमान क्रमशः `m_(1)` व `m_(2)` हैं (जैसा कि उपरोक्त चित्र में दर्शाया गया है)
तब चित्र से पथ AB की लम्बाई , `s_(1)=(h)/(sin theta_(1))`
व पथ AC की लम्बाई , `s_(2)=(h)/(sin theta_(2))`
तथा इनके अनुदिश त्वरण ,
`a_(1)=(m_(1)g sin theta_(1))/(m_(1))=g sin theta_(1)`
तथा `" "a_(2)=(m_(2)g sin theta_(2))/(m_(2))=g sin theta_(2)`
माना पथ AB पर बिंदु A से B तक कण को पहुँचने में लगा समय `t_(1)` व पथ AC पर A से C तक पहुँचने में लगा समय `t_(2)` है, तब समीकरण `s=ut+(1)/(2)at^(2)`में `u=0` रखकर इसका उपयोग करने पर,
`s_(1)=(1)/(2)a_(1)t_(1)^(2)`
अथवा `(h)/(sintheta_(1))=(1)/(2)a_(1)t_(1)^(2)=(1)/(2)g sin theta_(1)t_(1)^(2)`
अथवा `t_(1)=(1)/(sin theta_(1))sqrt((2h)/(g))=(1)/(sin 30^(@))sqrt((2xx10)/(10))`
`=2sqrt2` सेकण्ड
इसी प्रकार, `(h)/(sin theta_(2))=(1)/(2)a_(2)t_(2)^(2)=(1)/(2)g sin theta_(2)t_(2)^(2)`
अथवा `t_(2)=(1)/(sin theta_(2))sqrt((2h)/(g))`
अथवा `t_(2)=(1)/(sin 60^(@))sqrt((2xx10)/(10))=(2sqrt2)/(sqrt3)`सेकण्ड
अतः स्पष्ट है कि पत्थर पथ AC के अनुदिश नीचे पहुँचने में कम समय लेगा ।
(समीकरण `t_(1)=(1)/(sin theta_(1))sqrt((2h)/(g))" या "t_(2)=(1)/(sin theta_(2))sqrt((2h)/(g))` से स्पष्ट है कि `t prop (1)/(sin theta)` पुनः `sin theta prop theta ,` अतः `tprop (1)/(theta)`
अर्थात जिस पथ की ढाल अधिक होगी उस पथ पर लिया गया समय कम होगा)।
पुनः पथ AB के लिए,
`m_(1)gh=(1)/(2)m_(1)v_(1)^(2)`
अथवा `v_(1)=sqrt(2gh)`
चूँकि वेग के समीकरण में पथ के लम्बाई या ढाल को कोई व्यंजक नहीं है, अतः निश्चित h के लिए दोनों पथों पर पत्थर द्वारा अर्जित वेग समान होंगे। अर्थात
`v_(1)=v_(2)=sqrt(2gh)=sqrt(2xx10xx10)" मी/से "`
`=10sqrt2=14.1` मी/से ।