आनत समतल पर विराम स्थित गुटके का मुक्त-पिण्ड आरेख (बल आरेख) अंग्राकित चित्र में प्रदर्शित है। गुटके पर निम्न बल कार्य कर रहे हैं।
(i ) गुटके का भर Mg उसके गुरुत्व से ऊर्ध्वाधर नीचे की और ।
(ii ) आनत समतल पर इस भार Mg की प्रतिक्रिया R समतल के अभिलंबवत बाहर की ओर।
(iii ) गुटके व रुक्ष समतल के सम्पर्क पृष्ठ पर कार्य कर रहा घर्षण बल `f_(s)` समतल के अनुदिश ऊपर की ओर ।
(iv ) रस्सी जो स्प्रिंग से जुडी है, में तनाव जो कि परिमाण में स्प्रिंग में उत्पन्न प्रत्यानयन बल F(= kx) के समान है।
गुटके के भार Mg को रुक्ष समतल के अनुदिश एवं अभिलंबवत दिशाओं में वियोजित करने पर,
तल के अनुदिश घटक `=mg sin 37^(@)`
व तल के लंबवत घटक `=mg cos 37^(@)`
चूँकि गुटका विरामावस्था में है। अतः समतल के अभिलंबवत दिशा में गुटके के संतुलन के लिए,
`R=Mg cos 37^(@)`
पुनः चूँकि स्थैतिक-घर्षण बल `f_(s)=mu_(s)R=mu_(s)Mgcos 37^(@)`
माना गुटका मुक्त किए जाने के पश्चात तथा विराम में आने से पूर्व रुक्ष आंत समतल पर समतल के अनुदिश (चित्र देखें) x (= 10 सेमी= 0.10 मी ) दुरी तय करता है। तब ऊर्जा संरक्षण सिद्धांत से,
गुटके की स्थितिज ऊर्जा में कमी=खींचने के कारण स्प्रिंग की प्रत्यास्थ `-` स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि `+` घर्षण बल के विरुद्ध कृत कार्य
अथवा `" "Mgh=(1)/(2)kx^(2)+f_(s)x`
जहाँ स्प्रिंग का बल-नियतांक व h मुक्त किए जाने के बाद गुटके द्वारा ऊर्ध्वाधर दिशा में (उच्चतम बिंदु से नीचे कि ओर ) तय की गयी दुरी है।
परन्तु चित्र से `h=xsin 37^(@)`,
अतः `Mg xsin 37^(@)=(1)/(2)kx^(2)+mu_(s)Mg cos 37^(@)x`
अथवा `1xx10xx0.10xx(3)/(5)=(1)/(2)xx100xx(0.1)^(2)+(mu_(s)xx1xx10xx(4)/(5)xx0.1)`
`0.6=0.5+0.8mu_(s)`
`mu_(s)=(0.6-0.5)/(0.8)=(0.1)/(0.8)=0.125`.