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Class 11
PHYSICS
विरामावस्था में किसी मुक्त न्यूट्रॉन के ...

विरामावस्था में किसी मुक्त न्यूट्रॉन के क्षय पर विचार कीजिए `n rarr p+e^(-)` प्रदर्शित कीजिए कि इस प्रकार के द्विपिण्ड क्षय से नियत ऊर्जा का कोई इलेक्ट्रॉन अवश्य उतसर्जित होना चाहिए, और इसलिए यह किसी न्यूट्रॉन या किसी नाभिक के `beta` - अक्ष में प्रेक्षित सतत ऊर्जा वितरण का स्पष्टीकरण नहीं दे सकता (चित्र)।

[नोट : इस अभ्यास का हल उन कई तर्कों में से एक है जिन्हे डब्ल्यू पॉली द्वारा `beta`-क्षय के क्षय उत्पादों में किसी तीसरे कण के अस्तित्व का पूर्वानुमान करने के लिए दिया गया था । यह कण न्यूट्रिनो के नाम से जाना जाता है। अब हम जानते हैं कि यह निजी प्रचक्रण `1//2` (जैसे `e^(-),p` या n) का कोई कण है। लेकिन यह उदासीन है या द्र्व्यमानरहित या (इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान की तुलना में) इसका द्रव्यमान अत्यधिक कम है और जो द्रव्य के साथ दुर्बलता से परस्पर क्रिया करता है। न्यूट्रॉन की उचित क्षय-प्रक्रिया इस प्रकार है : [`nrarr+e^(-)+v`]

लिखित उत्तर

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दिए गये क्षय प्रक्रम का समीकरण , `n=p+e^(-)`
चूँकि न्यूट्रॉन (n ) विराम में है, अतः समीकरण के दायीं ओर प्राप्त कणों प्रोटॉन (p ) व इलेक्ट्रॉन `(e^(-))` का तुल्य संवेग शून्य होना चाहिए या दूसरे शब्दों में , प्रोटॉन का संवेग इलेक्ट्रॉन के संवेग के बराबर होना चाहिए ।
अब संवेग `" "p=mv`
अथवा `" "p^(2)=m^(2)v^(2)`
अथवा `" "(p^(2))/(2)=(1)/(2)mv^(2)xxm`
अथवा `" "p^(2)=2Km`
जहाँ K, m द्रव्यमान के गतिशील कण की गतिज ऊर्जा है।
अथवा गतिज ऊर्जा `K=(p^(2))/(2m)`
अतः स्पष्ट है कि इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा परिवर्तनशील होने के बजाय नियत होनी चाहिए। अतएव इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा प्रश्न में प्रदर्शित चित्र की भांति नहीं हो सकती । पॉली ने इस विरोधाभास का निराकरण एक परिकल्पना के आधार पर दिया । उनके अनुसार, इस प्रक्रिया में एक तीसरा कण जिसे ऐंटीन्यूट्रिनो कहते हैं, उतसर्जित होता है। ऐंटीन्यूट्रिनो का द्रव्यमान व आवेश शून्य व निज चक्रण (intrinsic spin ) + 1 / 2 होता है। अतः क्षय प्रक्रम निम्न प्रकार होना चाहिए :
`underset("न्यूट्रॉन ")n=underset("प्रोटॉन")p+underset("इलेक्ट्रॉन")(e^(-))+underset("एण्टीन्यूट्रिनो")(barv)`
इस प्रकार इलेक्ट्रॉन के सतत ऊर्जा वितरण को समझाने के लिए पॉली ने माना कि कुल उतसर्जित इलेक्ट्रॉन तथा ऐंटीन्यूट्रिनो की महत्तम और जब ऐंटीन्यूट्रिनो की ऊर्जा न्यूनतम हो, तो इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा महत्तम होती है।
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