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Class 12
PHYSICS
चित्र में एक विभवमापी दर्शाया गया है। ज...

चित्र में एक विभवमापी दर्शाया गया है। जिसमें एक 2.0V और 0.40`Omega` आन्तरिक प्रतिरोध का कोई सेल, विभवमापी के प्रतिरोधक तार AB पर वोल्टता पात (voltage drop) बनाए रखता है। कोई मानक सेल (standard cell) जो 1.02V का अचर वि.वा. बल बनाए रखता है। (कुछ mA की बहुत सामान्य धाराओं के लिए) तार की 67.3 cm लम्बाई पर सन्तुलन बिन्दु देता है। मानक सेल से अति न्यून धारा (very low current) लेना सुनिश्चित (ensure) करने के लिए इसके साथ परिपथ में `600kOmega` श्रेणी का एक अति उच्च प्रतिरोध सम्बद्ध किया जाता है, जिसे सन्तुलन बिन्दु प्राप्त होने के निकट लघुपथित (shorted) कर दिया जाता है। इसके बाद मानक सेल को किसी अज्ञात वि. वा. बल E के सेल से प्रतिस्थापित (replaced) कर दिया जाता है जिससे सन्तुलन बिन्दु तार की 82.3 cm लम्बाई पर प्राप्त होता है।

(a) E का मान क्या है?
(b) `600kOmega` के उच्च प्रतिरोध का क्या प्रयोजन (purpose) है?
(c) क्या इस उच्च प्रतिरोध से सन्तुलन बिन्दु प्रभावित होता है?
(d) क्या परिचालक सेल के आन्तरिक प्रतिरोध से सन्तुलन बिन्दु प्रभावित होता है?
(e) उपर्युक्त स्थिति में यदि विभवमापी के परिचालक सेल (driver cell) का वि. वा. बल 2.0V के स्थान पर 1.0V हो तो क्या यह विधि फिर भी सफल होगी?
(f) क्या यह परिपथ कुछ mV की कोटि के अत्यल्प (extremely small) विद्युत वाहक बलों (जैसे कि किसी प्रारूपी ताप विद्युत युग्म का विद्युत वाहक बल (such as the typical emf of a thermo-couple) के निर्धारण में सफल होगी? यदि नहीं, तो आप इसमें किस प्रकार संशोधन (modify) करेंगे?

लिखित उत्तर

Verified by Experts

(a) दिया है : `E_(1)=1.02V, l_(1)=67.3cm`
`E_(2)=E=?, l_(2)=82.3cm`
`because (E_(2))/(E_(1))=(l_(2))/(l_(1))`
`therefore (E)/(E_(1))=(l_(2))/(l_(1)) rArr (E)/(1.02)=(82.3)/(67.3)`
या `E=(82.3xx1.02)/(67.3)`
`=1.247=1.25` वोल्ट
(b) जब सम्पर्क बिन्दु सन्तुलन बिन्दु से काफी दूर होता है तो धारामापी से कम धारा गुजरने के उद्देश्य से `600kOmega` का उच्च प्रतिरोध प्रयोग किया जाता है।
(c) नहीं, क्योंकि शून्य विक्षेप बिन्दु के समीप पहुँचने पर इस प्रतिरोध को लघुपथित कर दिया जाता है।
(d) नहीं, परिचालक सेल के आन्तरिक प्रतिरोध के कारण सन्तुलन बिन्दु प्रभावित नहीं होता है।
(e) नहीं, यदि परिचालक सेल का वि. वा. बल मापे जाने वाले वि. वा. बल से कम है तो अविक्षेप स्थिति नहीं मिलेगी।
(f) अत्यल्प वि. वा. बल मापन के लिए परिपथ कार्य नहीं करेगा क्योंकि इसके लिए अविक्षेप बिन्दु A के निकट आयेगा, अत: अत्यल्प वि. वा. बल नापने के लिए विभवमापी तार AB की विभव प्रवणता घटानी होगी और इसके लिए उसमें प्रवाहित धारा कम करनी होगी। धारा कम करने के लिए परिचालक सेल के परिपथ में उच्च प्रतिरोध जोड़ना पड़ेगा।
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