चित्र में एक विभवमापी दर्शाया गया है। जिसमें एक 2.0V और 0.40`Omega` आन्तरिक प्रतिरोध का कोई सेल, विभवमापी के प्रतिरोधक तार AB पर वोल्टता पात (voltage drop) बनाए रखता है। कोई मानक सेल (standard cell) जो 1.02V का अचर वि.वा. बल बनाए रखता है। (कुछ mA की बहुत सामान्य धाराओं के लिए) तार की 67.3 cm लम्बाई पर सन्तुलन बिन्दु देता है। मानक सेल से अति न्यून धारा (very low current) लेना सुनिश्चित (ensure) करने के लिए इसके साथ परिपथ में `600kOmega` श्रेणी का एक अति उच्च प्रतिरोध सम्बद्ध किया जाता है, जिसे सन्तुलन बिन्दु प्राप्त होने के निकट लघुपथित (shorted) कर दिया जाता है। इसके बाद मानक सेल को किसी अज्ञात वि. वा. बल E के सेल से प्रतिस्थापित (replaced) कर दिया जाता है जिससे सन्तुलन बिन्दु तार की 82.3 cm लम्बाई पर प्राप्त होता है।
(a) E का मान क्या है?
(b) `600kOmega` के उच्च प्रतिरोध का क्या प्रयोजन (purpose) है?
(c) क्या इस उच्च प्रतिरोध से सन्तुलन बिन्दु प्रभावित होता है?
(d) क्या परिचालक सेल के आन्तरिक प्रतिरोध से सन्तुलन बिन्दु प्रभावित होता है?
(e) उपर्युक्त स्थिति में यदि विभवमापी के परिचालक सेल (driver cell) का वि. वा. बल 2.0V के स्थान पर 1.0V हो तो क्या यह विधि फिर भी सफल होगी?
(f) क्या यह परिपथ कुछ mV की कोटि के अत्यल्प (extremely small) विद्युत वाहक बलों (जैसे कि किसी प्रारूपी ताप विद्युत युग्म का विद्युत वाहक बल (such as the typical emf of a thermo-couple) के निर्धारण में सफल होगी? यदि नहीं, तो आप इसमें किस प्रकार संशोधन (modify) करेंगे?